जयगुरुदेव
09.06.2024
प्रेस नोट
जयपुर (राजस्थान)
*महापुरुषों के साथ समय-समय पर सहायक शक्तियां आती है*
*विनाश काले विपरीत बुद्धि, शराब-मांस का सेवन मत करो और पराई स्त्री पर कुदृष्टि मत डालो*
इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि
शक्तियां ऊपर से भेजी जाती है। महापुरुष परिवर्तन करने के लिए आते हैं। जो मनुष्य से अच्छा काम करते हैं, मनुष्य की सुख-सुविधा का ध्यान रखते हैं, उनको आंधी-आफत से बचाते हैं, उनके खाने रहने की सुविधा मुहैया कराते हैं, वह महापुरुष कहलाते हैं। साधारण पुरुष नहीं होते हैं। वह महापुरुष हो जाते हैं।
गुरु की दया शक्ति लेते हैं और उससे जो वो काम करते हैं, उससे वह महापुरुष हो जाते हैं। लेकिन उनके साथ में सहायक शक्तियां भी आती है। सहायक शक्ति कौन थे? सहायक शक्ति थी सीता, लक्ष्मण, हनुमान, जामवंत, बंदर-भालू, कर्म की सजा पा रहे जटायु। कर्मों के अनुसार ही उन योनियो में जाना पड़ता है। लेकिन वो भी एक शक्ति थी। देखो उसने सीता की लाज बचाने के लिए अपनी जान दे दिया था।
जटायु ने रावण द्वारा सीता को ले जाने में बाधा डाला था। तो यह सब होती है सहायक शक्तियां। तो सीता सहायक शक्ति थी इसलिए रावण के अंदर जो शक्तियां थी, उससे ज्यादा शक्ति थी। इसलिए जल जाता रावण अगर जबरदस्ती करता। उनको मनाता था, एक बार विलोकर मम मोरा, एक बार तुम मेरी तरफ देख लो तो उसकी तरफ देखती तो थी लेकिन तिन धर ओट, तिनधर किसको कहते हैं तिनका, घास का छोटा सा टुकड़ा और आंखों में ऐसे (पास में) लगा कर के जिससे पूरी नजर उससे न मिल पावे, उसको ऐसे लगा करके देखती थी।
*राम त्रेता युग के हीरो हैं*
हनुमान जी अगर चाहते तो सीता जी को हथेली पर बैठा करके, अशोक वाटिका, लंका से उड़ कर के लेकर चले आते। लेकिन सीता तैयार नहीं हुई। सीता को कब विश्वास हुआ? जब उन्होंने कहा था कि हमको कुछ (पहचान के लिए) दे दीजिए जिससे सीता मां को विश्वास हो जाए। तब उन्होंने मुद्रिका, अंगूठी दिया था।
उसमें उनका नाम लिखा हुआ था, राम नाम। उसको सीता पहचानती थी। तो पेड़ पर से जब हनुमान ने नीचे गिराया तब सीता को यह विश्वास हुआ कि राम का ही यह दूत है। नहीं तो मिलता कहां से ये उनको। यह मालूम था कि राम शक्ति हैं, उनको कोई मार नहीं सकता है जैसे सिनेमा के हीरो होते हैं। आजकल वो कहीं मरते हैं? नहीं मरते हैं, मारे-कूटे जाते हैं, बड़ी परेशानी झेलते हैं लेकिन मरते जल्दी नहीं है।
इसलिए सीता को मालूम था कि परिवर्तन के इस त्रेता युग के यह राम हीरो हैं, इनको कोई मार नहीं सकता है। और मरने के बाद ही अंगुठी आदि पहनी हुई चीजें निकाला जाता है। तो उनको यह मालूम था कि मुर्दा तो अभी नहीं हुए हैं। लगता है कि पहचान बताने के लिए इनको भेजा गया है।
तब उन्होंने जब देखा और पूछा, हनुमान ने बताया हां, हमारे प्रभु ने, आराध्य देव ने ही हमको भेजा है। और फिर जब आया, बातचीत किया, फिर जब जाने को हुआ तब हनुमान ने फिर से कहा पहचान के लिए मातु मोहि दीजे कछु चीन्हा तब उन्होंने अपना चूड़ा मणि उतार करके हनुमान को दिया था कि जाओ, तुम बताना राम को कि हम यहां पर हैं और जब ये लौट कर के गए तब उन्होंने तैयारी किया।
*विनाश काले विपरीत बुद्धि*
पहले तो बहुत समझाने की कोशिश किया, संदेशा भेजा लेकिन उसके समझ में नहीं आया। अगर शाकाहारी बुद्धि, सदाचारी दिमाग उसका होता तो रावण के समझ में आता लेकिन वह समझ में नहीं आया। वही चीज उसके अंदर जो बुराइयां थी, उसी के लिए पुलस्त ऋषि ने भी कहा था कि तेरे पास सारी शाला है, पाठशाला, यज्ञशाला आदि सब कुछ है लेकिन चरित्र शाला तेरी नहीं है क्योंकि तू मांस खाता, शराब पीता है और वो तेरे चरित्र को बनाए नहीं रख सकता है इसलिए यही, रावण तेरा, तेरे कुल खानदान का, लंका का विनाश करेगा।
लेकिन उसके समझ में न आया। मंदोदरी ने कितना समझाया, कहा वापस दे दो, पर नारी है वो, उन पर आप दृष्टि मत डालो, उनको वापस कर दो, बहुत बड़ी गलती किए हो। लेकिन विनाश काले विपरीत बुद्धि। तो राम को सेना तैयार करनी पड़ी, लड़ाई लड़नी पड़ी और लड़ाई करके उसका विनाश किया।
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